राष्ट्र विजयी हो हमारा

9:48 PM Edit This 1 Comment »
राष्ट्रभक्ति ले ह्रदय में है खड़ा अब देश हमारा
संकटों पर मात कर यह राष्ट्र विजयी हो हमारा
क्या कभी किसने सुना है, सूर्य छिपता तिमिर से
क्या कभी सरिता रुकी है, बाँध से वन पर्वतों से
जो न रुकते मार्ग चलते, चीरकर सब संकटों को
वरण करती कीर्ति उनका, तोड़कर सब असुर दल को
ध्येय मन्दिर के पथिक को कंटको का ही सहारा
संकटों पर मात कर यह राष्ट्र विजयी हो हमारा

1 comments:

RADHIKA said...

अच्छी कविता